कसम संविधान की

अगर आज हम अपने स्वार्थवश संविधान को ताक पर रखेंगे तो निश्चित ही हम एक ऐसी ही परम्परा की शुरुआत करके जा रहे है। इस परम्परा का दुरुपयोग ही होगा क्योंकि सरकारें आएगी, जाएगी....😢 

सत्ता का यह खेल तो लोकतंत्र में चलता ही रहेगा, परन्तु संविधान की नजरअंदाजगी पोषित कर रही है  ऐसी ही परम्पराओ को जिन्हें हमें समझना होगा।

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