आखिर निजीकरण क्यों ??
निजीकरण पर अधिक जानकारीलोगो को बेहतर सुविधाएं देने के लिए कुछ सेवाओं का निजीकरण करने की आवश्यकता है। क्योंकि कुछ सेवाओं का संचालन करने के लिए देश की अन्य सेवाओं के बजट में कटौती करनी पड़ रही है। यह तर्क है मोदी सरकार का निजीकरण के पक्ष में।
निजीकरण क्या है ???
निजीकरण से आशय है कि जब कोई सरकारी क्षेत्र की सेवा या उद्योग का संचालन या रखरखाव पूर्ण रूप से या आंशिक रूप से निजी हाथों के सौंप दिया जाए।
क्या आम लोगों को निजीकरण से फायदा होगा ???
इसे ऐसे समझे कि आप एक मध्यम वर्ग से है और खाना खाने गए। आप खाना ऐसे होटल में खाओगे जहाँ एयर कंडिशन लगे हो। एक प्रकार से पाँच सितारा होटल जहाँ पर बैठकर खाना खाना ही वहाँ के भोजन से ज्यादा महँगा हो।
शायद आप ऐसी जगह नही जाओग, आपको चाहिए अच्छा खाना चाहे वो नॉर्मल होटल ही क्यों ना हो।
क्योंकि हमें भूख मिटानी है वह एक साफ सुधरे छोटे होटल में भी मिट सकती है। ये ऊँचे पाँच सितारा होटल तो उनके काम के जो पहले से पूंजीपति है। गरीब किसान बेचारा करोना काल मे मास्क की जगह अपने साफा(गमछा) से मुँह को ढकने वाला भला ऐसी हरकत करेगा ?? कभी नही करेगा।
ऐसा ही निजीकरण से समझे अपने देश की कितनी ही आबादी है जिसमे रिजर्वेशन डिब्बे में यात्रा तक नही की क्योंकि वह सामान्य डिब्बो की तुलना में महंगा पड़ता है। सरकार को चाहिए कि पहले लोगों को उन्नत सुविधाओं को लेने लायक बनाये नही तो निजीकरण से उत्पन्न इस सुविधा रूपी मीठे फल का स्वाद देश की गरीब जनता तो चख ही नही पाएगी, उल्टा सामान्य डिब्बे में भी यात्रा करना उनके लिए दुरभर हो जाएगा।
प्रश्न - क्या उन्नत सेवाओ के लिए निजीकरण जरूरी है ??
उत्तर- घर मे यदि सांप घुस जाए तो उसके लिए पूरे घर को जलाना कितनी समझदारी होगी।
इसके लिए बहुत सारे विकल्प हमारे पास है। जब इस एक कदम से सरकारी नोकरिया खत्म हो रही है। जिस उद्योग या सेवा को राष्ट की सम्पति से तैयार किया उसे निजी हाथों में देना कितना तर्कसंगत है ??
"किसी ने कहा है जब भी आप सरकार में रहकर नीतिगत फैसले लो तो पंक्ति में बैठे अन्तिम व्यक्ति को याद रखना" लेकिन यहाँ तो इस बात का सरासर उलंघन हो रहा है। देश मे सरकार पंक्ति के आगे बैठे आदमी को देख कर फैसले ले रही जो कितना घातक सिद्ध होगा ये तो वक्त ही बताएगा।
सही बात
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